किसी भी वास्तु, घर, भवन की
जागृतता 21साल,15साल,7साल या 21महिनो के बाद वास्तु
जागृत होती है। इस अवधी के
बाद सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होते है।
पंचतत्व की प्रभावशाली
उर्जा वास्तुशास्त्र के अनुसार उसमे रहाणेवले मनुष्यपर सिधा असर करती है।
वास्तुशास्त्र ब्रम्हान्ड के पाच तत्वपर आधारित है।
पाच तत्व इसप्रकर है
पृथ्वी
जल
अग्नी
वायू
आकाश
मानव शरीर की रचना भी इनही
पाच तत्वोपर आधारित है, इसलीये इन पांच तत्वका प्रभावशाली परिणाम सिधा असर करते
हुए दिखाई देता है। आजकल के आधुनिक युगमे वास्तुशास्त्रों पर आधारित वास्तुका
निर्माण कम हुवा, डिजाइन और सुंदरता के लिये वास्तु
सनियमोका पालन नही कीया
जाता, और आमतौर पर वास्तु वास्तुदोष युक्त होते है।
ऐसी वास्तु जब सात या
पंधरा साल के बाद जागृत होती है तब अनेक समस्या और बिमारीयोंका निश्चीत तौरपे
सामना करना पडसकता। वास्तुशास्त्र के नियम घर, ऑफिस, शॉप, फॅक्टरी,
हॉस्पिटल इत्यादी के लिये लागु होते, आप वास्तुदोष युक्त निर्माण का वास्तुशास्त्र के अनुसार
थोडे-फार बदल करके कई समस्यावोसे छुटकारा पासकते। किसी अनुभवी वास्तुशास्त्री से
मार्गदर्शन ले तो ज्यादा उचित राहेगा।
SATISH SOMNATHE
jyotish shiromani
contact for appointment..7218551701
